नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में शाही जामा मस्जिद (Sambhal Masjid) सर्वेक्षण विवाद को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब सोमवार को सुनवाई करेगा। तब तक कोर्ट ने आदेश दिया है कि विवादित स्थल की यथास्थिति बनाए रखें। यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें निचली अदालत ने मस्जिद का सर्वेक्षण अदालत के नियुक्त कमिश्नर से कराने का निर्णय बनाए रखा था।
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मुस्लिम पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफ़ा अहमदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट का आदेश क़ानून के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की है कि उपासना स्थल अधिनियम किसी भी तरह के सर्वेक्षण पर रोक नहीं लगाता, जबकि यह व्याख्या ग़लत है। वहीं हिंदू पक्ष ने इस मुद्दे को उपासना स्थल अधिनियम से जोड़ने का विरोध किया।
हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि शाही मस्जिद पहले से ही एक संरक्षित स्मारक है, इसलिए यहां उपासना स्थल अधिनियम लागू नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित स्थल पर मंदिर से जुड़े प्राचीन साक्ष्य नष्ट किए जा रहे हैं, इसलिए वहां सर्वेक्षण कराना ज़रूरी है।

इस बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष से पूछा कि इस मामले को उन मामलों से क्यों न जोड़ा जाए, जिनमें पहले ही प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट से जुड़े सवाल उठाए जा चुके हैं। हालांकि कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस आदेश से मुस्लिम पक्ष प्रभावित है और हाई कोर्ट ने भी इस एक्ट का ज़िक्र किया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 25 अगस्त को तय की है। तब तक मस्जिद परिसर में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश लागू रहेगा।
19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने दावा किया कि संभल की शाही जामा मस्जिद ही श्रीहरिहर मंदिर है। इसके बाद उसी दिन शाम को मस्जिद के पहले चरण का सर्वे शुरू हुआ और 24 नवंबर को दूसरा चरण पूरा किया गया। इस बीच मस्जिद परिसर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे देखते ही पथराव और गोलीबारी शुरू हो गई।


