मुंबई। आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। बाजार के रुझान (Market Analysis) का निर्धारण महंगाई, टैरिफ, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और एफआईआई पर आधारित होगा। भारत सरकार आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी करेगी। जुलाई के आंकड़ों के अनुसार पता चलता है कि वस्तुओं की कीमतों में कितनी तेजी से इजाफा हो रहा है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत को परिभाषित करेगा और बाजार के रुझान को प्रभावित करेगा। अगर महंगाई दर बढ़ती है तो इसका नकारात्मक असर हो सकता है क्योंकि इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसके तहत औद्योगिक निर्यात पर समझौते करने वाले व्यापारिक साझेदारों को टैरिफ छूट मिलेगी। यह छूट 14 सितंबर से लागू होगी, और इसमें निकल, सोना, फार्मास्युटिकल कंपाउंड और केमिकल जैसी प्रमुख सामग्रियां शामिल हैं। इससे वैश्विक व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और भारतीय बाजार पर भी प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अगले हफ्ते अमेरिकी महंगाई, जॉबलेस क्लेम और अन्य आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं। इन आंकड़ों का वैश्विक बाजार पर असर देखने को मिल सकता है, जिससे भारतीय शेयर बाजार भी प्रभावित हो सकता है। अगर अमेरिकी आंकड़े कमजोर आए तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति में बदलाव की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकता है।

पिछला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। निफ्टी ने 314.15 अंक (1.29 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 24,741 का स्तर छुआ, जबकि सेंसेक्स 901.11 अंक (1.13 प्रतिशत) की तेजी के साथ 80,710.76 पर बंद हुआ। 1-5 सितंबर के कारोबारी सत्र में निफ्टी ऑटो (5.45 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (5.75 प्रतिशत), निफ्टी कंजम्प्शन (2.58 प्रतिशत) , निफ्टी एनर्जी (1.96 प्रतिशत), निफ्टी , निफ्टी कमोडिटी (2.52 प्रतिशत) और पीएसयू बैंक (1.47 प्रतिशत) शीर्ष लाभ में रहे। इसके अलावा निफ्टी आईटी इंडेक्स (1.55 प्रतिशत) में गिरावट देखी गयी है।
इसका संकेत है कि बाजार में कुछ बदलाव संभव हैं और निवेशकों को सावधानीपूर्वक रणनीति बनानी चाहिए। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने पिछले सप्ताह 5,666.90 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 13,444.09 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसका मतलब है कि घरेलू निवेशक भारतीय बाजार में अधिक आशावादी दिख रहे हैं, जबकि विदेशी निवेशकों ने कुछ सतर्कता दिखाई।


