मुंबई। ईरान-इज़रायल और अमेरिका में जारी जंग की वजह से भारत में LPG Crisis पैदा हो गया है। एक ओर जहां देश के कई इलाकों में पुलिस सुरक्षा में गैस सिलेंडर (gas cylinder) बांटे जा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर संकट के बीच भी गैस सिलेंडरों की जमकर कालाबाजारी (gas cylinder black marketing) हो रही है। इस दौरान मुंबई के वर्ली इलाके में राशन वितरण विभाग ने गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी से जुड़े एक रैकेट का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के तहत गैर-कानूनी तरीके से जमा किए गए सैकड़ों भरे और खाली सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
इसे भी पढ़ें-Iran Israel War: ईरान ने बुर्ज खलीफा के पास फिर से बोला धावा, मच गई अफरा-तफरी
वर्ली में सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग का भंड़ाफोड़:
दरअसल मुंबई में राशन डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर (gas cylinder) की ब्लैकमार्केटिंग रोकने के लिए एक अभियान चला रहा है। इसी सिलसिले में वर्ली इलाके में गैस सिलेंडर की ब्लैकमार्केटिंग का पर्दाफाश करते हुए गैस सिलेंडर का एक बड़ा स्टॉक ज़ब्त किया। यह कार्रवाई न केवल आर्थिक अपराध बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मुंबई के वर्ली नाका स्थित गणपतराव कदम मार्ग पर सूरज वल्लभदास चॉल क्षेत्र में एलपीजी गैस सिलेंडर अवैध रूप से संग्रहित कर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे थे। जानकारी मिलने पर कार्रवाई करते हुए राशन डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट और पुलिस ने तुरंत इलाके में छापा मारा और भारी मात्रा में गैर-कानूनी तरीके से स्टोर किए गए सिलेंडर जब्त कर लिया। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भारी मात्रा में गैस सिलेंडर बरामद:
राशन डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट की इस छापेमारी में अलग-अलग ब्रांड और साइज़ के कुल 172 सिलेंडर बरामद हुए है। जिसमें HP गैस के 5 किलोग्राम वाले 58 खाली और 6 भरे हुए सिलेंडर मिले। जबकि सुपर गैस के 4 किलोग्राम वाले 64 भरे हुए और 12 किलोग्राम वाले 19 भरे हुए सिलेंडर मिले। इसके अलावा 12, 4 और 2 किलोग्राम के 25 अन्य खाली सिलेंडर भी जब्त किए गए।

LPG सिलेंडरों की कालाबाजारी पर प्रशासन सख्त:
LPG सिलेंडरों की कालाबाजारी को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। छापेमारी के बाद अधिकारियों ने बताया कि इन सिलेंडरों को गैर-कानूनी तरीके से रिफिल किया गया था और इन्हें ब्लैक मार्केट में बेचा जाना था। जब्त किए गए सिलेंडर वर्ली पुलिस स्टेशन को सौंप दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने साफ किया कि ऐसे रिहायशी इलाके में सिलेंडर स्टोर करना और गैर-कानूनी तरीके से बेचना बेहद खतरनाक है और इससे जान को गंभीर खतरा है। गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डिपार्टमेंट की टीमें 24 घंटे अलर्ट पर हैं।
उत्तर प्रदेश में एक घर से 32 सिलेंडर बरामद:
मुंबई के साथ ही उत्तर प्रदेश के हापुड़ में पुलिस ने एक घर से 32 सिलेंडर जब्त किए। इसमें 18 भरे हुए और 14 खाली सिलेंडर थे। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रिहान के रूप में हुई है। रिहान के खिलाफ जमाखोरी और कालाबाजारी का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी रिहान फरार है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
बिहार में भी भारी मात्रा में सिलेंडर ज़ब्त:
इसके अलावा बिहार में, पुलिस और प्रशासन ने घरेलू LPG सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कई जगहों पर छापेमारी की। एक टिप-ऑफ़ पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने पटना के शाहपुर इलाके में 100 सिलेंडर ज़ब्त किए। जबकि अररिया में एक दुकान से अलग-अलग कंपनियों के लगभग 135 से 150 LPG सिलेंडर बरामद किए गए।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का भारत पर पड़ रहा असर:
गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट (middle east) में चल रहे तनाव ने कच्चे तेल और पेट्रोलियम सप्लाई पर असर डाला है। इससे कमर्शियल गैस समेत घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। हालांकि सरकार का दावा है कि पर्याप्त मात्रा में LPG सिलेंडरों का स्टॉक है। बावजूद इसके पूरे देश में गैस सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग देखी जा रही है। लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए अलग-अलग जगहों पर लाइन में लग रहे हैं।
ईंधन क्यों हो रहा महंगा?
कच्चा तेल एक प्राकृतिक हाइड्रोकार्बन मिश्रण है, जिसे सीधे उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसे उपयोगी ईंधनों और अन्य उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए आंशिक आसवन (फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन) की प्रक्रिया का सहारा लिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान कच्चे तेल को गर्म किया जाता है, जिससे विभिन्न हाइड्रोकार्बन अणु उनके अलग-अलग बॉयलिंग पॉइंट के आधार पर अलग किए जाते हैं। हल्के अणु कम तापमान पर उबलते हैं और इसलिए वे आसवन स्तंभ के ऊपरी हिस्से में पहुँचकर ठंडे होकर संघनित हो जाते हैं। वहीं, भारी अणु उच्च तापमान पर उबलते हैं और भारी होने के कारण स्तंभ के निचले हिस्से में रहते हैं।
सभी ईंधन एक ही कच्चे तेल से तैयार किए जाते हैं, इसलिए यदि कच्चे तेल का उत्पादन घटता है तो रिफाइनरियों को भी कम मात्रा में तेल उपलब्ध होता है। रिफाइनरियां अलग-अलग ईंधन को एक निर्धारित अनुपात में तैयार करती हैं, ऐसे में किसी एक ईंधन की कमी को दूसरे से पूरा करना आसान नहीं होता।


