Kiradu Temple: इस मंदिर में सूरज डूबते ही इंसान बन जाते हैं पत्थर!

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श्वेता सिंह, मीडिया इंडस्ट्री में आठ साल का अनुभव रखती हैं। इन्होंने बतौर कंटेंट राइटर कई प्लेटफॉर्म्स पर अपना योगदान दिया है। श्वेता ने इस दौरान...
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राजस्थान। राजस्थान, एक ऐसा नाम जिसकी राजसी वैभवशैली और समृद्ध संस्कृति से दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां की रहस्यमय जगहें न सिर्फ इतिहास को दोहराती हैं, बल्कि हर घूमने वाले को नई कहानियोंसे बांधती भी हैं। इन्हीं रोमांचक स्थानों में से एक है किराडू मंदिर (kiradu temple), जो किराडू मंदिर परिसर, बाड़मेर में स्थित है और जिसे “राजस्थान का खजुराहो” कहा जाता है।

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अपनी प्राचीन वास्तुकला और एक रहस्यमय श्राप के कारण यह मंदिर खासा चर्चित है। सरकार की तरफ से यहां एक एडवायज़री जारी की गई है, जिसमें शाम के समय मंदिर में प्रवेश पूरी तरह बंद रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि रात में यहां रहने वाला व्यक्ति अगली सुबह वापस नहीं निकल पाता।

यह रहस्यमय मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित है और शहर से इसकी दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। इस मंदिर में देवों के देव महादेव विराजमान हैं। इसका निर्माण दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली के अनुरूप किराडू मंदिर के रूप में कराया गया है। रहस्यों से घिरा यह किराडू मंदिर देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इतिहासकारों के अनुसार किराडू मंदिर का निर्माण परमार वंश के शासकों द्वारा कराया गया था।

सरल शब्दों में कहें, तो किराडू मंदिर एक हजार साल पुराना है। इसे द्रविड़ वास्तुकला शैली में तैयार किया गया है, जो किराडू मंदिर को वास्तुकला के एक अनुपम उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करता है। किराडू मंदिर में सोमेश्वर महादेव मंदिर सबसे बड़ा है और उसकी आस्था अलौकिक महत्ता भी रखती है।

स्थानीय जानकारों के अनुसार किराडु मंदिर अत्यंत रहस्यमय स्थान है। कहते हैं कि प्राचीन समय में एक संत इस गांव में आए थे और उन्होंने यही रहने का चयन किराडू के लिए किया था। एक बार संत किसी कार्य के सिलसिले में अन्य जगह चले गए। तब उन्होंने अपने शिष्यों से कहा था कि वे उनका ख्याल रखें। उसी समय उनके एक शिष्य की सेहत बिगड़ गई और किसी ने उसकी मदद नहीं की। गांव के सभी लोग उसका सहारा देने से इनकार कर बैठे। इस कठिन मौके पर गाँव की एक महिला ने शिष्य की सेवा की और उसकी देखभाल की। उसकी निस्वार्थ सहायता से शिष्य स्वस्थ हो गया।

जब संत वापस लौटे और शिष्य के बीमार रहने की सूचना मिली, तो उन्होंने गांव वालों को श्राप दे दिया कि शाम होते ही तुम सभी पत्थर में बदल जाओगे लेकिन उसी महिला से कहा गया कि देवी! आप जल्द गांव छोड़कर चली जाओ और जाते समय पीछे मुड़कर मत देखना। ऐसा करने पर यह गांव वीरान हो जाएगा। उस समय महिला गांव छोड़कर जाने लगी, पर यात्रा के दौरान उसने पीछे मुड़कर देख लिया। इसी कारण वह भी पत्थर की हो गई। तब से कहा जाता है कि किराडू मंदिर में शाम ढलते ही रुकना मना है, अन्यथा वहां भी पत्थर बन जाने का खतरा हो सकता है।

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श्वेता सिंह, मीडिया इंडस्ट्री में आठ साल का अनुभव रखती हैं। इन्होंने बतौर कंटेंट राइटर कई प्लेटफॉर्म्स पर अपना योगदान दिया है। श्वेता ने इस दौरान अलग-अलग विषयों पर लिखा। साथ ही पत्रकारिता के मूलभूत और जरूरी विषयों पर अपनी पकड़ बनाई। इन्हें महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल से जुड़ाव है और इन्होंने इसे लेकर कई आर्टिकल्स लिखे हैं।
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