झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन का निधन, कई दिनों से थे बीमार

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श्वेता सिंह, मीडिया इंडस्ट्री में आठ साल का अनुभव रखती हैं। इन्होंने बतौर कंटेंट राइटर कई प्लेटफॉर्म्स पर अपना योगदान दिया है। श्वेता ने इस दौरान...
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झारखंड। झारखंड (Jharkhand) के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन (Shibu Soren) का निधन हो गया है। वे 81 साल के थे। दिशोम गुरुजी (Dishom Guruji) के नाम से प्रसिद्ध सोरेन ने आज सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक उन्हें सुबह 8.56 बजे मृत घोषित कर दिया।

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उनके निधन की खबर से झारखंड (Jharkhand) में शोक की लहर दौड़ गयी है। उनका जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन शिक्षक थे। महाजनों के द्वारा उनकी हत्या के बाद शिबू सोरेन (Shibu Soren) पढ़ाई छोड़कर गांव आ गये। आदिवासी समाज को एकजुट करना शुरू किया। 1970 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष शुरू कर दिया।

1980 में शिबू सोरेन (Shibu Soren) पहली बार लोकसभा सदस्य बने। इसके बाद उन्होंने कई बार संसद (Parliament) में आदिवासी मुद्दों को उठाया और झारखंड राज्य गठन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके प्रयासों और लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ। राज्य गठन के बाद शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने- 2005, 2008 और 2009 में।

झामुमो (JMM) सुप्रीमो को उनके समर्थक प्यार से ‘गुरुजी’ कहते थे। उन्होंने महाजनों और सूदखोरों के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया। धनकटनी आंदोलन जैसे अभियानों के जरिये सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी। Shibu Soren की सादगी और जनता के प्रति समर्पण ने उन्हें झारखंड (Jharkhand) की राजनीति में एक विशेष स्थान दिलाया।

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श्वेता सिंह, मीडिया इंडस्ट्री में आठ साल का अनुभव रखती हैं। इन्होंने बतौर कंटेंट राइटर कई प्लेटफॉर्म्स पर अपना योगदान दिया है। श्वेता ने इस दौरान अलग-अलग विषयों पर लिखा। साथ ही पत्रकारिता के मूलभूत और जरूरी विषयों पर अपनी पकड़ बनाई। इन्हें महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल से जुड़ाव है और इन्होंने इसे लेकर कई आर्टिकल्स लिखे हैं।
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