डेस्क। चीन ने 3 सितंबर को बीजिंग में दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार के 80 वर्ष पूरे होने के मौके पर एक भव्य विक्ट्री डे मिलिट्री परेड (China Military Parade 2025) का आयोजन किया। इस दिन को चीन में हर साल ‘विक्ट्री डे’ के रूप में मनाया जाता है। आज इस परेड में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तियानमेन चौक पर परेड की सलामी ली और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती दी।
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राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने भाषण में अमेरिका का नाम लिए बगैर तीखे शब्दों में अपने इरादे जाहिर किए। उन्होंने कहा कि चीन किसी भी प्रकार की धमकियों से डरने वाला नहीं है और वह हमेशा अपने रास्ते पर चलता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानवता को शांति और युद्ध, बातचीत और टकराव, लाभ और नुकसान के बीच सही रास्ता चुनना होगा। उनके इस बयान को व्यापारिक टैरिफ नीतियों और वैश्विक प्रभाव पर तीखीं टिप्पणी के रूप में देखी जा रही है।
चीन के राष्ट्रपति ने आगे कहा कि इंसान एक ही ग्रह पर रहते हैं, इसलिए हमें मिलकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे के साथ शांति से रहना चाहिए। उनका मानना था कि दुनिया को पुराने जंगल राज में वापस नहीं लौटना चाहिए, जहां बड़े देश छोटे और कमजोर देशों को धमकाते थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन हमेशा शांति और सहयोग के रास्ते पर कायम रहेगा।

इस विक्ट्री डे परेड में चीन ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कई नए और अत्याधुनिक हथियारों और मिसाइलों को प्रदर्शित किया। इस आयोजन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन सहित 26 विदेशी नेताओं ने भाग लिया। इनमें से कुछ देशों को लेकर चीन के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, खासकर अमेरिका और पश्चिमी देशों में लोग काफी मंथन कर रहे है। विशेष रूप से, रूस और उत्तर कोरिया के नेताओं की मौजूदगी ने इस परेड को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। यह आयोजन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और क्षेत्रीय शक्ति के संकेत के रूप में देखा गया। चीन की इस परेड को अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ एक मजबूत कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो चीन के एकजुटता और शक्ति की पुष्टि करता है।

